फर्जी दस्तावेज़ वालों पर सख्ती, असली नाविक रहेंगे सुरक्षित

04 सितंबर तक जमा करें दस्तावेज़, डीजीएस ने दी समय सीमा

न्यूज़ टैंक्स

मुंबई: हाल ही में सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि विदेशी सर्टिफिकेट ऑफ कम्पिटेंसी (COC) रखने वाले भारतीय नाविकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। अफवाहों से पैदा हुई इस आशंका को दूर करते हुए नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने साफ किया है कि विदेशी COC पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। डीजीएस ने स्पष्ट किया कि नया सर्कुलर नंबर 31/2025 और आदेश नंबर 8/2025 केवल फर्जीवाड़े को रोकने और असली नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।

डीजीएस का कहना है कि हाल के दिनों में अप्रमाणित सोशल मीडिया पोस्ट और चर्चाओं ने उसके आधिकारिक आदेशों को गलत तरीके से पेश किया। इस वजह से नाविकों में यह डर फैल गया कि उनका करियर खतरे में है। जबकि सच्चाई यह है कि जिन नाविकों के पास किसी विदेशी समुद्री प्रशासन से वैध प्रमाणपत्र है और वह इस सर्कुलर में सूचीबद्ध नहीं है, वे पहले की तरह ही जहाजों पर काम जारी रख सकते हैं।

इसके लिए डीजीएस ने 30 दिन का समय दिया है जिसमें नाविकों को अपने दस्तावेज़ अपनी संबंधित आरपीएसएल एजेंसी के माध्यम से जमा कराने होंगे। जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन और प्रमाणीकरण होने के बाद रोजगार पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। महानिदेशालय ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियम-आधारित होगी, ताकि असली और फर्जी दस्तावेजों के बीच फर्क किया जा सके।

डीजीएस ने मरीन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (MTIs) के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मौजूदा स्वीकृत संस्थान आगे भी संचालित हो सकेंगे, लेकिन उन्हें एसटीसीडब्ल्यू मानकों और डीजीएस की प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। वहीं नए संस्थानों को संचालन शुरू करने से पहले गहन मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

डीजीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि असली प्रमाणपत्र धारकों को इस पहल से कई फायदे होंगे। उनका करियर सुरक्षित रहेगा, उनके दस्तावेजों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता बढ़ेगी और भारतीय नाविकों की विश्वसनीयता में इजाफा होगा। वहीं, यदि कोई फर्जी प्रमाणपत्र के साथ पकड़ा जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों को संबंधित विदेशी प्रशासन को रिपोर्ट किया जाएगा, व्यक्ति को सेवा से अयोग्य ठहराया जा सकता है और कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।

नाविकों के लिए दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि 4 सितंबर 2025 तय की गई है। डीजीएस ने कहा है कि यह पहल असली नाविकों को दंडित करने के लिए नहीं है बल्कि उनकी वैध योग्यता को पहचान दिलाने और उन्हें धोखाधड़ी से बचाने के लिए है।

संपर्क के लिए डीजीएस ने ईमेल आईडी भी जारी की है।
डेक ऑफिसर्स के लिए – nt-stcw@gov.in
मरीन इंजीनियर्स के लिए – engg-stcw@gov.in

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