मोदी सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत समुद्री क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत की अपनी राष्ट्रीय कंटेनर शिपिंग लाइन स्थापित करने की दिशा में भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (BCSL) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे। कार्यक्रम में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर भी शामिल हुए।
यह MoU शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण, वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण, चेन्नई पोर्ट प्राधिकरण और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच हुआ। यह पहल केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) से जुड़ी हुई है।

₹59 हजार करोड़ के निवेश की तैयारी
सरकार की योजना ₹59,000 करोड़ के निवेश से राष्ट्रीय कंटेनर बेड़ा और देश में ही कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने की है। इससे भारत की निर्यात–आयात (EXIM) लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी और विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
तूतीकोरिन पोर्ट के लिए ₹15 हजार करोड़ का MoU
इसी मौके पर वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (तूतीकोरिन) के आउटर हार्बर प्रोजेक्ट के लिए एक अलग त्रिपक्षीय MoU पर भी हस्ताक्षर हुए। यह समझौता पोर्ट प्राधिकरण, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन (SMFCL) के बीच हुआ। इसके तहत सागरमाला कार्यक्रम और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत ₹15,000 करोड़ तक के संयुक्त वित्तपोषण का प्रावधान है।

‘भारतीय हाथों में रहेगा कंटेनर व्यापार’
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये पहलें मैरीटाइम अमृत काल 2047 के विजन को आगे बढ़ाने वाली हैं। भारत कंटेनर शिपिंग लाइन से देश का कंटेनर व्यापार भारतीय हाथों में रहेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय कंटेनर लाइन का सपना अब साकार हो रहा है। CONCOR की भागीदारी से देश में विश्वस्तरीय कंटेनर इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के साथ कंटेनरीकृत कार्गो में तेज बढ़ोतरी होगी। ऐसे में BCSL जैसी पहल भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में नई ताकत देगी।

