सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा (आई.डी.सी.एफ.) की हुई शुरुआत

कानपुर। बाल्यावस्था में 05 वर्ष से कम आयु के बच्चों में 10 प्रतिशत मृत्यु दस्त के कारण होती है, जो कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख बच्चों की मृत्यु का कारण बनता है । दस्त के कारण बच्चों में होने वाली कमजोरी और बच्चों की मृत्यु को रोकने के लिए जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नैपाल सिंह ने निर्देशानुसार जिले में सोमवार के दिन मान्यवर काशीराम संयुक्त चिकित्सालय में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का शुभारम्भ किया गया । काशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. स्वदेश गुप्ता और ए.सी.एम.ओ. डॉ. एस.के.सिंह ने फीता काट कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया ।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व परिवार कल्याण नोडल डॉ. एस.के. सिंह ने कहा कि दस्त रोग बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में दूसरे स्थान पर है । इसका मुख्य कारण दूषित पेय जल, स्वच्छता एवं शौचालय उपयोग का अभाव तथा 05 वर्ष तक के बच्चों का कुपाषित होना है । दस्त का उपचार ओ.आर.एस. एवं जिंक की गोली मात्र से किया जा सकता है और बच्चों की मृत्यु को रोका जा सकता है । इसके लिए प्रत्येक वर्ष की तरह सघन दस्त रोग नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है । 02 से 14 अगस्त तक चलने वाले इस पखवाड़े में समुदाय में डायरिया या दस्त से बचाव और प्रबंधन पर लोगो को जागरूक किया जायेगा । इसके साथ ही कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता घर-घर जा कर ओ.आर.एस. पैकेट पहुचाएंगे और लोगो को दस्त के प्रति जागरूक भी करेंगे ।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सुचना अधिकारी राजेश यादव ने बताया कि इस बार जिले के 5 लाख बच्चों तक ओ.आर.एस. के पैकेट पहुँचाने का लक्ष्य है । पखवाड़े के अन्तर्गत लक्षित लाभार्थियों में मुख्यतः ऐसे परिवार जिनमें 05 वर्ष से कम आयु के बच्चे हों, 05 वर्ष तक के समस्त बच्चे जो दस्त से ग्रसित हों, 05 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों वाले परिवार, जनपद के ऐसे क्षेत्र जहाँ पूर्व में डायरिया आउटब्रेक हुआ हो एवं बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र और दूर दराज़ के क्षेत्रों में प्राथमिकता पर ओ.आर.एस. के पैकेट और जिंक की गोलियां पहुंचाई जायेंगी और लोगो को दस्त नियंत्रण और प्रबंधन पर जागरुक किया जायेगा ।