राज्यसभा में कृषि बिल पेश, कृषि मंत्री बोले- मनचाही कीमत पर फसल बेचने की होगी आजादी

न्यूज़ टैंक्स | लखनऊ

नई दिल्ली : देशभर में विवादों के बीच कृषि बिल को राज्यसभा में पेश कर दिया गया है। ये विधेयक किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य दिलाने, कृषि उपज के बाधा मुक्त व्यापार को सक्षम बनाने के साथ ही किसानों को अपनी पसंद के निवेशकों के साथ जुड़ने का मौका प्रदान करने से संबंधित है।

हालांकि इसके विरोध में संसद से लेकर सड़क तक बवाल मचा गया है। बिल पेश करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि बिल का एमएसपी से कोई मतलब नहीं है। यह दोनों अलग अलग है। एमएसपी आगे भी जारी रहेगी। वहीं विपक्ष ने इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसानों को अपने उत्पाद अधिसूचित कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) यानी तय मंडियों से बाहर बेचने की छूट देना है। इसका लक्ष्य किसानों को उनकी उपज के लिये प्रतिस्पर्धी वैकल्पिक व्यापार माध्यमों से लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना है। इस कानून के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री पर कोई उपकर या शुल्क नहीं लिया जायेगा।

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक 2020- इस प्रस्तावित कानून के तहत किसानों को उनके होने वाले कृषि उत्पादों को पहले से तय दाम पर बेचने के लिये कृषि व्यवसायी फर्मों, प्रोसेसर, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ अनुबंध करने का अधिकार मिलेगा।

लाभ- इससे किसान का अपनी फसल को लेकर जो जोखिम रहता है वह उसके उस खरीदार की तरफ जायेगा जिसके साथ उसने अनुबंध किया है। उन्हें आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट तक पहुंच देने के अलावा, यह विपणन लागत को कम करके किसान की आय को बढ़ावा देता है।

इस बिल को लोकसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। बिल के विरोध में पंजाब-हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। वही सरकार का दावा है कि नया कानून खेतीबारी में ‘लाइसेंस राज’ को समाप्त कर देगा और किसान अपनी पसंद के अनुसार अपनी कृषि उपज बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे।

कृषि विधेयकों पर जमकर विरोध जता रहे विपक्षी दल खासकर कांग्रेस की कोशिश इसे राज्यसभा में रुकवाने की है। विपक्षी दल विधेयक को किसान विरोधी ठहरा रही है। जबकि प्रधानमंत्री के साथ पूरी सरकार की कोशिश विधेयक को पास कराने और इसे किसानों का हितैषी बताने की है।